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शहीद सचिन का माँ को आखिरी पैगाम – माँ मेरा इंतज़ार मत करना मुझे दुश्मन को कुचलना है

एक माँ के लिए इससे ज्यादा दुःख की क्या बात होगी कि उसका जवान बेटा उसे छोडकर चला जाए. 19 साल की उम्र में ही सचिन शहीद हो गये है. शहीद होने से पहले दिन सचिन ने माँ सावित्री से फोन पर बात की थी. माँ अपने बेटे को लेकर परेशान तो रहती ही है. वैसे ही सचिन की माँ ने उनसे कहा तुम कुछ खा पी लिया करो बहुत कमजोर हो रहे हो. इसपर सचिन ने कहा माँ दुश्मनों के लिए पतला ही सही हूँ. घर आने को लेकर सचिन ने कहा माँ इस बार मेरा इंतज़ार मत करना मुझे दुश्मनों को कुचलना है. माँ को क्या पता था कि जिस बेटे से वो आज बात कर रही है उससे उसे आगे बात करने का मौका नही मिलेगा. बेटे की आखिरी बात को माँ को पूरी जिन्दगी याद रहेगी.

जिस दिन सचिन ने माँ से फोन पर बात की थी उस समय वह बहुत खुश था और माँ के लिए उसके आखिरी शब्द थे मै इस bar लौटकर नही आऊंगा मेरा इंतज़ार न करना मुझे दुश्मनों को कुचलना है. अगले दिन ही सचिन शहीद हो गये. जाट रेजिमेंट के कर्नल कमल सिंह ने सचिन को लेकर बताया कि वे काम के प्रति बहुत ज्यादा जागरूक थे और बहुत ज्यादा ईमानदार भी थे. उन्हें जो भी काम करने के लिए कहा जाता था वो समय से पहले ही हो जाता था. यहाँ तक खुद के परिवार को लेकर भी वे बहुत ज्यादा सोचते थे.

सचिन के पिता ने उनसे कई बार शादी करने की बात की लेकिन हर बार सचिन यही कहते पहले भाई और बहन को पढाना है. ऐसे में कल को अगर मुझे कुछ हो जाता है तो मेरे जाने के बाद पत्नी की जिम्मेदारी भी पापा पर आ जाएगी. ऐसा कहकर वे हर बार घरवालो की बोलती बंद करवा देते है. सचिन खेलो में पहले से ही बहुत ज्यादा रूचि थी उन्हें कई तरह के अवार्ड देकर सम्मानित भी किया जा चूका है. साल 2018 अरुणाचल में सचिन दुश्मनों से लड़ते हुए शहीद हो गये थे. उनकी माँ और परिवार के लोग आज भी उनकी कही बातो को याद करके रोने लग जाते है.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सचिन ने UP से 13 दिसम्बर 2016 को ट्रेनिंग शुरू की थी. इसके बाद वे अक्तूबर में 15 दिनों की छुटियाँ लेकर घर आये था. छुटियाँ बिताने के बाद उनकी पहली पोस्टिंग नवंबर अरुणाचल प्रदेश के तवांग में हुई थी. सचिन को घरवालो को बहुत याद आती थी इसलिए वे 3 से 4 दिन के अंदर घर फोन जरुर कर लेते थे. सचिन ने अपने पिता को अपना ATM कार्ड तक दे दिया था उनका कहना था कि वे एक ऐसी जगह ड्यूटी कर रहे है जहाँ उन्हें पैसो की बिलकुल जरूरत नही पडती है.

सचिन की जिन्दगी में एक पल वो भी था जब उनके घर की आर्थिक स्थिति ठीक नही थी. इस बीच सचिन को स्पोर्ट्स का बहुत शौक था और जूते न खरीद पाने के कारण वे यमुना नदी में नंगे पैर दौड़ लगाते थे. बचपन से ही सचिन का फौजी बनने का सपना था और अपनी मेहनत के दम पर उन्होंने अपना ये सपना पूरा कर दिखाया है.

 

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