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अकेले ही 25 टेररिस्ट से भीड़ गए मेजर मोहित शर्मा, दुश्मनों को मारकर हो गए शहीद

इंडियन आर्मी का नाम सुनते ही अपने देश के जवानों की झलक सी मन में उभर पड़ती है। जब भी आप किसी आर्मी ऑफिसर को देखते होंगे तो इनके बलिदान व त्याग की सारी बातें मन में आने लगती होंगी पर यह भी सच है कि हमारे देश की रक्षा के लिए ये जवान अपने जान की भी परवाह नहीं करते हैं। सीमा पर तैनात इन जवानों के कारण ही तो हम सभी सुख व चैन की जिंदगी बिता रहे हैं वरना कभी भी हमारे साथ कुछ भी हो सकता है। यूं कह लें तो ये किसी योद्धा से कम नहीं होते हैं।

आज हम आपको एक ऐसे ही योद्धा के बारे में बताने जा रहे हैं जिसे आज पूरा देश सलाम कर रहा है। जी हां इस वीर योद्धा के अंदर कुछ ऐसा करने का जज्बा था जिसकी वजह से नामुमकिन को भी मुमकिन कर दिखाया। जिनके बारे में हम बात कर रहे हैं वो भारतीय सेना अशोक चक्र विजेता मेजर मोहित शर्मा है। इनके दोस्त इन्हें माइक के नाम से बुलाते थें।

बताते चलें कि हरियाणा के रोहतक में मेजर मोहित शर्मा का जन्म 13 अगस्त 1978 को हुआ था। उनके पिता का नाम राजेंद्र प्रसाद शर्मा और माता का नाम सुशील शर्मा है। मेजर मोहित शर्मा सिर्फ शौक के लिए नहीं बल्कि अपने जुनून के कारण भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मेजर मोहित शर्मा बहुत ही बहादुर सिपाही थे, जी हां थें क्योंकि अब वो इस दुनिया में नहीं है।

बता दें कि 21 मार्च 2009 को कश्मीर में हफरूदा के जंगल में आतंकियों को मारने के लिए जब एक ऑपरेशन चलाया गया था। उस वक्त मेजर मोहित के साथ उनकी टीम में सिर्फ 10 लोग थे। इन्हें आतंकियों के शिविर की जानकारी मिली थी। भारतीय सेना ने आतंकियों के कैंप पर हमला कर दिया था। दोनों तरफ से फाय रिंग हुई और इस दौरान मेजर मोहित को भी गोली लग गई थी। जिसकी वजह से वो और उनके दो साथी भी घायल हो गए थें।

जैसा कि आप सभी जानते भी होंगे कि सेना द्वारा किया गया ऑपरेशन कितना खतरनाक होता है, वहीं इसके बावजूद भी वो किसी भी हाल में अपने मंजिल से पीछे नहीं हटते हैं। वो अपने परिवार बाल बच्चे सभी को भूलकर मिशन पर आगे बढ़ते हैं और सर पर कफन बांध लेते हैं। उन्हें अपनी भारत माता के दुश्मनों को खत्म करने में जरा भी डर नहीं लगता है। ।

कुछ ऐसा ही जज्बा दिखा मेजर मोहित में तभी तो गोली लगने के बावजूद खुद की जान की परवाह किए बगैर मेजर मोहित ने अपने दोनों दोनों साथी जवानों को बचाया और ग्रेनेड से हमला कर अकेले ही करीब 25 आतंकवादियों से लोहा लिया। लेकिन बता दें कि इस ऑपरेशन के दौरान मेजर मोहित शर्मा के साथ ही आठ अन्य जवान भी शहीद हो गए थे। शहीद मेजर मोहित को बाद में अशोक चक्र से सम्मानित किया गया था। इसी जज्बे के साथ हर सेना का हर जवान आर्मी में भर्ती होते हैं और दुश्मनोंं को नाकाम कर देते हैं ।

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