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घर में कैसे करें पितृदोष की पहचान, जानें इसका कारण और निवारण

पितृ पक्ष की शुरुआत 13 सितंबर से हो रहा हैं और यह 28 सितंबर तक चलेगा| पितृ पक्ष में लोग अपने पूर्वजों की पूजा-अर्चना करके उन्हें खुश करने की कोशिश करते हैं ताकि उनके पूर्वजों का आशीर्वाद उन्हें प्राप्त होता रहे| दरअसल ऐसा माना जाता हैं कि यदि किसी के घर में  पितृ दोष उत्पन्न हो जाए तो वह घर और उस घर में रहने वाले लोग कभी खुश नहीं रह पाते हैं| इसलिए आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि पितृ दोष के लक्षण क्या हैं और यदि पितृ दोष उत्पन्न हो गए हैं तो उनका निवारण कैसे करे|

पितृ दोष के लक्षण

यदि किसी के घर में पितृ दोष उत्पन्न हो गया हैं तो उस व्यक्ति को बहुत कष्ट उठाने पड़ते हैं| यदि आपके घर में पितृ दोष उत्पन्न हो गया हैं तो आपके बच्चो की शादी मे देरी होगी, विवाहित जीवन में समस्याएँ उत्पन्न होगी, परीक्षा में सफल नहीं होंगे, घर के लोग नशे के आदि होंगे, नौकरी नहीं लगेगी, गर्भपात और बच्चो की अकाल मृत्यु आदि लक्षण पितृ दोष उत्पन्न होने पर नजर आते हैं| इसके अलावा जब किसी व्यक्ति की कुंडली में ये दो महत्वपूर्ण ग्रह पाप भाव में होते हैं तो व्यक्ति का जीवन पितृदोष के चक्र में फंस जाता है|

हिन्दू शास्त्र के मुताबिक मृत्यु के पश्चात पुत्र द्वारा किया गया श्राद्ध कर्म की मृतक को वैतरणी पार करवाता है और यदि जिस व्यक्ति का अपना पुत्र ना हो तो उसकी आत्मा कभी मुक्त नहीं हो पाती हैं| हालांकि आज के समय में पुत्रियाँ भी अंतिम संस्कार कर रही हैं लेकिन यह शास्त्र के अनुकूल नहीं माना जाता हैं| ऐसे में व्यक्ति की आत्मा भटकती रहती हैं| इतना ही नहीं यदि कोई व्यक्ति अपने पिता को कष्ट पहुंचाता हैं या फिर उनकी हत्या कर देता हैं तो उसे अगले जन्म में पितृ दोष की समस्या को झेलना पड़ता हैं|

पितृदोष का निवारण

(1) यदि कोई व्यक्ति पितृदोष से पीड़ित है और उसे अनेक बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है तो उसे अपने पूर्वजों का श्राद्ध कर्म संपन्न करना चाहिए। वो भले ही अपने जीवन में कितना ही व्यस्त क्यों ना हो लेकिन उसे अश्विन कृष्ण अमावस्या को श्राद्ध अवश्य करना चाहिए। ऐसा करने से व्यक्ति को पितृ दोष से मुक्ति मिलती हैं|

(2) बृहस्पतिवार के दिन शाम के समय पीपल के पेड़ की जड़ में जल चढ़ाने और फिर सात बार उसकी परिक्रमा करने से व्यक्ति को पितृदोष से राहत मिलती है।

(3) पितृ दोष से पीड़ित व्यक्ति शुक्लपक्ष के प्रथम रविवार को घर में पूरे विधि-विधान से ‘सूर्ययंत्र’ स्थापित कर सूर्यदेव को प्रतिदिन तांबे के पात्र में जल लेकर, उस जल में कोई लाल फूल, रोली और चावल मिलाकर, अर्घ दे| ऐसा करने से पितृ दोष से राहत मिलती हैं|

(4) शुक्ल पक्ष के प्रथम शनिवार को शाम के समय पानी वाला नारियल अपने ऊपर से सात बार वारकर बहते जल में प्रवाहित कर दें और फिर अपने पूर्वजों से मांफी मांग कर उनसे आशीर्वाद प्राप्त करे|

(5) रविवार के दिन खासतौर पर गाय को गुड़ खिलाएं और जब स्वयं घर से बाहर निकलें तो गुड़ खाकर ही निकलें।

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