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जानिए ऐसे मस्जिद के बारे में जहाँ लोग क़ुरान के साथ-साथ पढ़ते हैं बाइबल और वेद

यह दुनिया बहुत बड़ी है। इस दुनिया में तरह-तरह के लोग रहते हैं और कई धर्मों का पालन किया जाता है। हर धर्म की कुछ ख़ासियत होती है। हर धर्म में लोगों को अच्छाई के मार्ग पर चलने की सीख दी जाती है। ये सीख लोगों को धार्मिक पुस्तकों से मिलती है। हर धर्म में धार्मिक पुस्तकें हैं जो इंसान को अच्छाई के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करती है। इस्लाम में लोग क़ुरान का पाठ करते हैं तो वहीं ईसाई धर्म को मनाने वाले लोग बाइबल पढ़ते हैं।

अगर हम बात हिंदू धर्म की करें तो हिंदू धर्म में लोग श्रीमद्भागवत गीता, रामायण, महाभारत जैसे धार्मिक ग्रंथों को पढ़ते हैं। इसके साथ ही कई वेद और उपनिषद हैं, जिनके पाठ से इंसान को अच्छाई के मार्ग पर चलने की सीख मिलती है। आज के समय में सोशल मीडिया पर किस तरह की ख़बरें चल रही हैं, यह किसी को बताने की ज़रूरत नहीं है। आज सोशल मीडिया के माध्यम से नफ़रत फैलाने का काम किया जाता है। इसी नफ़रत की वजह से कई लोगों ने अपनी जान भी गँवा दी है। लेकिन आज नफ़रत के इस दौर में भी कुछ लोग हमारे सामने मिसाल पेश करते हैं।

अन्य धर्म की पुस्तकों को भी दिया जाता है महत्व:

सांप्रदायिक नफ़रत के बीच गंगा जामुनी के उदाहरण अक्सर सामने आते हैं, जिसे देखकर लगता है कि आज भी लोगों के अंदर इंसानियत बची हुई है। हाल ही में इसी तरह का एक उदाहरण असम की एक मस्जिद में देखने को मिल रहा है। जैसा हर मस्जिद में देखने को मिलता है, उससे अलग नज़ारा इस मस्जिद में देखने को मिल रहा है। इस मस्जिद में जितना महत्व क़ुरान को दिया जाता है, उतना ही महत्व अन्य धर्म की पुस्तकों को भी दिया जाता है। इससे यही पता चलता है कि यहाँ धर्म के नाम पर नफ़रत फैलाने का संदेश नहीं बल्कि लोगों के बीच मुहब्बत फैलाने का काम किया जाता है।

बांग्ला भाषा में रखी है सारी किताबें:

आज के समय में इस मस्जिद के लाइब्रेरी की तारीफ़ सोशल मीडिया पर हर जगह हो रही है। इस लाइब्रेरी में सांप्रदायिक सौहार्द की अद्भुत मिसाल देखने को मिल रही है। हम जिस मस्जिद की बात कर रहे हैं, वह कोई और नहीं बल्कि असम के काचर जिले में स्थित जामा मस्जिद है। इस मस्जिद के दूसरे माले पर लाइब्रेरी स्थित है। इस लाइब्रेरी में लगभग 1 दर्जन आलमारियाँ हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि इस लाइब्रेरी में हिंदू, इस्लाम और ईसाई धर्म से जुड़ी हुई 300 किताबें रखी हुई हैं। यहाँ रखी किताबें बांग्ला भाषा में हैं।

2012 में हुआ सपना साकार:

मस्जिद के सचिव सबीर अहमद चौधरी हैं। उन्होंने बताया कि, ‘उन्हें इस सुविधा पर गर्व है और उनका मक़सद मुस्लिमों को अन्य धर्मों के बारे में भी शिक्षित करना है।’ इस लाइब्रेरी में इस्लाम धर्म से जुड़ी किताबों के साथ ही ईसाई दर्शन, वेद, उपनिषद, रामकृष्ण परमहंस और विवेकानंद की बायोग्राफ़ी के साथ रविंद्रनाथ टैगोर व सरत चंद्र चटोपाध्यय के उपन्यास भी रखे हुए हैं। सबीर ने कहा कि वो 1948 में इस मस्जिद के निरामन के समय ही लाइब्रेरी को बनाना चाहते थे, लेकिन उनका यह सपना 2012 में जाकर पूरा हुआ। आपकी जानकारी के लिए बता दें सबीर सोनाई स्थित एमसीडी कॉलेज में अंग्रेज़ी के एचओडी हैं।

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