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बेटे की फीस के लिए पिता ने बेच दी जमीन आज वही बेटा IPS बन कर रहा उनका नाम रौशन

दोस्तों इस दुनिया में हमारे माँ बाप से बढकर कोई नही होता. माँ बाप खुद भूखा रहते है लेकिन अपने बच्चो को किसी भी चीज की कमी महसूस नही होने देते है. माँ का बाप हमेशा अपने बच्चो का साथ देते है. हमेशा माँ को ही कहा जाता है कि वह अपने बच्चे को 9 महीने पेट में रखती है उसकी देखभाल करती है. जबकि पिता का तो कहीं नाम भी नही आता है. लेकिन जितना योगदान अपने बच्चे की परवरिश में माँ का रहता है उतना ही पिता का भी रहता है. अगर पिता कमाएगा नही तो माँ और उसके बच्चे का पालन पोषण कैसे होगा. एक मर्द इसलिए कमाता है ताकि उसका परिवार खुश रहे और एक अच्छा जीवन बिता सके. पिता के योगदान को कभी कम नही समझना चाहिए.

आज हम आपको एक ऐसे पिता के बारे में बताने जा रहे है जिसने अपने बेटे की फीस के लिए गाँव की जमीन तक बेच दी है. उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जगह के रहने वाले नुरुल हसन का बचपन और जवानी काफी कठिनाइयों से बीती है. उनके घर की आर्थिक स्थिति भी ठीक नही थी फिर भी उन्होंने हार नही मानी और लगातार आगे बढ़ते रहे. नुरुल ने अपनी मेहनत और हिम्मत के दम से ही अपने छोटे से गाँव से सिविल सेवा परीक्षा तक का सफर पूरा किया है. अपने परिवार के सपने को सच करने वाले नुरुल का पूरा परिवार आज उनके IPS बनने पर गर्व कर रहा है.

न गाड़ी की सुविधा न अच्छी पढाई न ही कोई फेसिलिटी फिर भी हर तरह की मुश्किलों को पार करते हुए साल 2015 में नुरुल का IAS में चयन हो गया. यहाँ तक नुरुल ने बिना किसी कोचिंग के ही UPSC की कठिन परीक्षा भी पास कर दी. इस समय नुरुल भारतीय पुलिस सेवा IPS में महाराष्ट्र में तैनात है. नुरुल बताते है कि उनकी स्कुल की पढाई के समय बहुत कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था. वे स्कुल जाते और पिता गाँव में ही खेती करते थे. उनका जीवन बेहद गरीबी में पला है. उनके पास एक ऐसा घर तक नही था जहाँ वे ठीक से सो सके.

बरसात के समय में उनके स्कुल की छत से पानी टपकता था तो वे घर से कपड़ा बैठने के लिए लेकर जाते थे. नुरुल के घर में उनके माँ बाप के अलावा 2 छोटे भाई थे. नुरुल ने ब्लॉक के गुरुनानक हायर सेकेंडरी स्कुल अमरिया से 67 % लेकर दसवी क्लास में टॉप किया. इसके बाद नुरुल ने मनोहर लाल भूषण कोलेज से 75% के साथ 12वी पास की. 12 वी पास करने के बाद नुरुल का सिलेक्शन AMU अलीगढ़ में बीटेक में हो गया. लेकिन उनके पास फीस भरने के लिए पैसे नही थे तो इसपर उनके पिता ने अपने गाँव की एक एकड़ जमीन बेचकर उनकी पढाई की फीस भरी थी.

ये नुरुल की हिम्मत लग्न और उनके पिता का प्यार है है कि इतनी बुरी परिस्थितियों को पार करके वे आज IPS बन गये है. उनके बुरे समय में भले ही उनके साथ कोई दूसरा था या नही लेकिन नुरुल के पिता ने उनका साथ कभी नही छोड़ा और उनकी पढ़ी में भी कोई कमी नही रखी.

 

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